वाहनों पर रिफ्लेक्टर की कमी बन रही हादसों का कारण

Image may contain: one or more people, text that says 'पालन सुरक्षित सड़क जागरण सुरक्षित यातायात सप्ताह जागरण 24- नवंवर, www.jagran.com वाहनों पर रिफ्लेक्टर की कमी भी बन रही हादसों का बड़ा कारण जुगाड़, रिक्शा, ओवरलोड और ट्रेक्टर ट्राली बन रहे दुर्घटनाओं सबव सड़क किनारे खड़े वाहन भी हादसों की बड़ी वजह ्योरा अक्टूवर क व्योरा रिफलेक्टर देशभर सिग्नल हताहतो संख्या सड़क (सोत: हादसे 3,16,421 12,018 अकुश 3,19,028 12,256 8,764 24,100 1261,545 5,325 4,006 1,797 10,522 8,144 945'

सड़कों पर रोज दुर्घटनाएं हो रही हैं रात में दुर्घटना का मुख्य कारण है गन्नों से भरा ट्रैक्टर ट्राला,ट्रॉली व ट्रक आदि के पीछे रेडियम साइन न लगा होना है, रात में जब हम अपने निजी वाहन से निकलते हैं तो सड़कों पर अंधेरा होता है और सामने से वाहन की रिफ्लेक्स लाइट पड़ती है, तो ट्रैक्टर टोला व ट्रक आदि खड़े हुए या चलते हुए दिखाई नहीं देते और दुर्घटना हो जाती है, आए दिन कितने ही व्यक्तियों को अकारण ही जान गंवानी पड़ती है इसलिए मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अनुरोध करती हूं कि सड़कों के किनारे लाइटों का प्रबंध किया जाए, अगर लाइट नहीं हो पा रही हैं तो वाहनों के पीछे एक रेडियम साइन का बोर्ड लगा होना चाहिए जो दूर से ही चमके यह समस्या पूरे उत्तर प्रदेश की है लेकिन हमारे जिले में कुछ ज्यादा ही दुर्घटनाएं इसी कारण से हो रही हैं, इस तरह का नियम , कानून या कोई भी गाइडलाइन जारी करें, जो वाहन खराब हो जाते हैं अंधेरे में खड़े होते हैं उनके भी पीछे रेडियम साइन का बोर्ड लगा होना नितांत आवश्यक है दूसरे जो हमारे किसान गन्ना लेकर मिल पर जाते हैं खास तौर से अनुपशहर मिल पर कोई रैन बसेरा बना हुआ नही है, कई दुर्घटनाएं इस तरह से हुई है कि रात में जब ठंड होती है तो किसान अपने ट्रोला के नीचे सो जाते हैं ट्रेक्टर ट्राला खिसख जाने से ट्राला के नीचे सो रहे किसान की मृत्यु हो जाती वहाँ रुकना इसलिये पड़ता है कि बहुत देर में नंबर आता है सुबह से शाम हो जाती है और शाम से सुबह हो जाती है उसके लिए वह उन्हें वाहनों के नीचे सोना पड़ता है इस दुर्घटना से हर साल कितने लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है उसके लिए सर जी से निवेदन है कि अनुपशहर चीनी मिल पर एक रैन बसेरे की भी व्यवस्था किसानों के लिए की जानी चाहिए जिससे दुर्घटनाएं ना हो।

सावित्री चौधरी
जनसंख्या समाधान फाउंडेशन