पेंसन योजना को बदला जाये – सावित्री चौधरी

सरकारी कर्मचारी या आम नागरिक 58/60 साल के बाद ही पेंशन का पात्र होता है।उसको एक ही पेंशन मिलेगी जब तक जीवित रहेगा। लेकिन विधायक, मंत्री, या मुख्यमंत्री जितनी बार बनेंगे उनको उतनी बार पेंशन मिलती है।आखिर क्यों ? उनके लिए एक ही बार पेंशन व 60 साल की उम्र का नियम क्यो नही ?
पेंशन का हकदार व्यक्ति तब होता है जब वह व्यक्ति वृद्ध हो जाता है या किसी कारण आजीविका कमाने लायक नहीं रहता।

लेकिन अगर नेता 5 बार विधायक बने तो 5 बार पेंशन मिलती है ।और तो और उनकी पेंशन तुरन्त शुरू हो जाती है उसके लिए कोई 60 साल की उम्र का नियम नहीं है। इस पेंशन पर सरकार संज्ञान क्यों नही लेती ? इस मामले पर सब पार्टी के नेता भला चुप्पी क्यों साधे हुए है । वे बात तो करते है एक देश , एक राज्य , एक नियम, सम्मान अधिकार , फ़िर भेद भाव क्यो?
क्या हाथी के दांत खाने के और व दिखाने के और वाली कहावत चरितार्थ हो रही है ?

पेंशन छोड़ने का निर्णय ये विधायक व सांसद स्वमं क्यों नही लेते?